रायगढ़ । चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश हो रही है। रायगढ़ में भी पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी है। लेकिन इस बारिश का फायदा उठाकर जिले के कुछ उद्योगों द्वारा पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर प्रदूषित पानी और कोयले की डस्ट खुले में बहाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि रायगढ़ मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर बांगुरसियां गांव स्थित शिव शक्ति प्लांट से केमिकल युक्त कोयले की डस्ट और काला पानी जंगल के रास्ते सीधे केलो नदी में छोड़ा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश की आड़ में प्लांट प्रबंधन द्वारा केमिकल युक्त प्रदूषित पानी बाहर निकाला जा रहा है, जो बहकर केलो नदी में मिल रहा है। पिछले दो दिनों से केलो नदी का पानी काला और मटमैला नजर आ रहा है। नदी में नहाने और रोजमर्रा के कामों के लिए पहुंचने वाले लोगों ने भी पानी के रंग में बदलाव की शिकायत की है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि शिव शक्ति प्लांट के आसपास के पेड़-पौधों पर काली डस्ट की मोटी परत जमी हुई दिखाई देती है। आरोप है कि उद्योग में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए ईएसपी (ESP) का समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि सामान्य दिनों में भी आसपास के इलाकों में कोयले की काली धूल फैलती रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि केलो नदी रायगढ़ शहर की जलापूर्ति का प्रमुख स्रोत है। नदी से पानी लेकर नगर निगम द्वारा पछतारी स्थित फिल्टर प्लांट में शोधन किया जाता है, जिसके बाद शहर के 48 वार्डों में पानी की सप्लाई होती है। ऐसे में यदि नदी में वास्तव में केमिकल युक्त प्रदूषित पानी मिल रहा है, तो यह शहरवासियों की सेहत और पेयजल सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब नदी का पानी ही प्रदूषित हो रहा है, तो उसकी गुणवत्ता की जांच कौन कर रहा है? क्या नगर निगम के फिल्टर प्लांट तक पहुंचने वाले पानी की नियमित जांच की जा रही है? और क्या शोधन के बाद पानी पूरी तरह सुरक्षित है?स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर सवाल उठा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद पर्यावरण विभाग के अधिकारी मौन हैं और आम लोगों को प्रदूषण का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पर्यावरण विभाग शिव शक्ति प्लांट से निकलने वाले पानी की जांच कराएगा? क्या नदी में प्रदूषण फैलाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या उद्योग प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी या फिर बारिश थमने के साथ ही यह पूरा मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?










